14. प्रतिदाय/रिफड

प्र 1. प्रतिदाय/रिफड क्या है?

प्र 2. क्या अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में प्रतिदाय/रिफड की अनुमति दी जा सकती है?

प्र 3. क्या अप्रयुक्त आई.टी.सी. पर प्रतिदाय/रिफंड दिया जा सकता है, उन मामलों में जहां भारत के बाहर वस्तुओं के निर्यात निर्यात शुल्क के अधीन हैं?

प्र 4. क्या वित्त वर्ष के अंत में स्टाक में रखी वस्तुओं पर आई.टी.सी.(जी.एस.टी. लागू होने के बाद) प्रतिदाय/रिफंड किया जा सकता है?

प्र 5. मान लीजिए कि एक कराधीन व्यक्ति ने गलती से आईजी.एस. टी./सी.जी.एस.टी. को अंतर-राज्य/राज्य के भीतर की आपूर्ति के रूप में भुगतान किया है, लेकिन उसकी प्रकृति को बाद में स्पष्ट कर दिया है। क्या गलत तरीके से भुगतान किये सी.जी.एस.टी./एस.जी. एस.टी. को आई.जी.एस.टी. के विरूद्ध समायोजित किया जा सकता है या उसके विपरीत?

प्र 6. क्या दूतावासों या संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई खरीदारी पर कर लगेगा या छूट दी जा सकती है?

प्र 7. प्रतिदाय/रिफड प्राप्त करने की समय सीमा क्या है?

प्र 8. क्या न्यायविरूद्ध संवर्धन का सिद्धांत प्रतिदाय/रिफड पर लागू होगा?

प्र 9. किसी मामले में यदि कर उपभोक्ता को पारित कर दिया गया है, क्या प्रतिदाय/रिफड स्वीकृत हो जाएगा?

प्र 10. क्या प्रतिदाय/रिफंड स्वीकृत करने की कोई समय सीमा है?

प्र 11. क्या प्रतिदाय/रिफड पर विभाग द्वारा रोक लगाई जा सकती है?

प्र 12. जहाँ प्रतिदाय/रिफड पर धारा 38(9) के अंतर्गत रोक लगाई गई है, जैसा कि ऊपर 11(सी) में चर्चा की गई है, क्या कराधीन व्यक्ति को ब्याज दिया जाएगा?

प्र 13. क्या प्रतिदाय/रिफंड के लिए कोई न्यूनतम सीमा है?

प्र 14. पुराने कानून से उत्पन्न प्रतिदाय/रिफड का भुगतान कैसे किया जाएगा?

प्र 15. क्या प्रतिदाय/रिफंड का भुगतान दस्तावेजों के सत्यापन से पहले किया जा सकता है?

प्र 16. निर्यात के अंतर्गत प्रतिदाय/रिफड के मामले में, क्या प्रतिदाय/रिफड प्रदत्त करने के लिये बी.आर.सी. अनिवार्य है?

प्र 17. कया न्यायविरूद्ध संवर्धन का सिद्धांत निर्यात या माने गये नियति (deemed exports) पर लागू होंगे 

प्र 18. एक व्यक्ति यह कैसे साबित करेगा कि न्यायविरूद्ध संवर्धन के सिद्धांत उसके मामले में लागू नहीं होते हैं?

प्र 19. मौजूदा समय में वैट/सी.एस.टी. व्यापार के अंतर्गत निर्यातक घोषणा पत्र प्रस्तुत कर बिना कर के भुगतान किये वस्तुएं खरीद सकते हैं। क्या जी.एस.टी. में भी यह प्रणाली अस्तित्व में रहेगी?

प्र 20. केंद्रीय कानून के अंतर्गत वर्तमान में निर्यातकों को शुल्क के भुगतान की गई इनपुट/आदानों प्राप्त करने की अनुमति है, उस पर आई.टी.सी. ले सकते हैं और शुल्क का भुगतान करने के बाद वस्तुओं का निर्यात कर सकते हैं (आई.टी.सी. का उपयोग करने के बाद) और  तत्पश्चात निर्यात पर भुगतान शुल्क का प्रतिदाय/रिफड का दावा कर सकते हैं। क्या जी.एस.टी. में भी यह प्रणाली जारी रहेगी?

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