1. वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) का अवलोकन



प्र 1. वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) क्या है?

उत्तर: यह वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर लगाया गया गंतव्य आधारित कर है। इसे विनिर्माण से अंतिम उपभोग के सभी चरणों पर कर लगाने के लिये प्रस्तावित किया जाता है और पिछले चरणों में भुगतान किये कर को अलग करने के लिये क्रेडिट प्राप्त किया जाता है। संक्षेप में, केवल मूल्य संवर्धन (value addition) पर ही कर लगाया जाएगा और कर का बोझ अंतिम उपभोक्ता द्वारा वहन किया जाएगा |


प्र 2. उपभोग पर गंतव्य आधारित कर की वास्तव में क्या अवधारणा है?

उत्तर: उस कर-प्राधिकरण को कर की प्राप्ति, जिसके अधिकार क्षेत्र के स्थान पर उपभोग किया जाएगा और जिसे आपूर्ति स्थल भी कहा जाता है, उपजित है।



प्र 3. किस मौजूदा कर को जी.एस.टी. में सम्मिलित करने के लिये प्रस्तावित किया गया है?

उत्तर: जी.एस.टी. में निम्नलिखित करों को प्रतिस्थापित किया जायेगाः

(i) आज के समय केंद्र द्वारा वर्तमान समय पर लगाए और संग्रह किए जाने वाले कर:

क. केंद्रीय उत्पाद शुल्क

ख. उत्पाद शुल्क (दवाईयां और प्रसाधन पदार्थ)

ग. अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विशेष महत्व की वस्तुएं)

घ. अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (कपड़ा और कपड़ों की वस्तुएं)

 

(ii) उन राज्य करों को स्पष्ट करें जिन्हें जी.एस.टी. में प्रतिस्थापित किया जाएगा:

क. राज्य वैट(मूल्य वर्धित कर)

ख. करेंद्रीय बिक्री कर

ग. विलास कर (लक्जरी टेक्स)

घ. प्रवेश कर (सभी रूपों में)

मनोरंजन और मनोरंजक कर (सिवाय तब जब स्थानीय निकायों द्वारा करारोपण किया गया है)

विज्ञापनों पर कर

लॉटरी, शर्त और जुए पर कर



प्र 4. जी.एस.टी. के अंतर्गत उपरोक्त करों को सम्मिलित करने के लिये किन सिद्धांतों को अपनाया गया था?

उत्तर: विभिन्न केन्द्रीय, राज्य और स्थानीय करों का परीक्षण करने के बाद जी.एस.टी. में सम्मिलित करने की संभावना की पहचान की गई थी। पहचान करने के समय, निम्न सिद्धान्तों को ध्यान में रखा गया थाः

(i) सम्मिलित किये जाने वाले करों या उपकरों को मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष कर की प्रकृति में, या तो वस्तु की आपूर्ति या सेवाओं की आपूर्ति होना चाहिये।

(ii) सम्मिलित किये जाने वाले करों या उपकरों को लेनदेन की श्रृंखला का हिस्सा होना चाहिये जो आयात/विनिर्माण वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं के एक स्थान पर प्रारम्भ के साथ दूसरे स्थान पर वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग पर समाप्त होता है ।

(iii) करों या करारोपण (लेवी) सम्मिलित करने के परिणाम स्वरूप राज्य के भीतर और अंतर-राज्य स्तर टैक्स क्रेडिट का मुक्त प्रवाह होना चाहिए। जो कर, उपकर और फीस विशेष रूप से वस्तुओं और सेवाओं में की आपूर्ति से संबंधित सम्मिलित नहीं किये जाने चाहिए।

(iv) केंद्र और राज्यों को व्यक्तिगत रूप से राजस्व निष्पक्षता का प्रयास करने की आवश्यकता होगी | नहीं हैं जी.एस.टी. के अंर्तगत


प्र 5: किन वस्तुओं को जी.एस.टी. के दायरे से बाहर रखा जाना प्रस्तावित हे?

उत्तर मानव उपभोग के लिए षराब, पेट्रोलियम उत्पाद अर्थात |, मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), हाई स्पीड डीजल, प्राकृतिक

पेट्रोलियम तेल गैस और विम नन टर्बाइन ईधन एवं बिजली |



प्र 6: जी.एस.टी. क्रियान्वित करने के बाद उपरोक्त वस्तुओं के करारोपण के संबंध में क्या स्थिति होगी?

उत्तर: उपरोक्त वस्तुओं के संबंध में मौजूदा कराधान प्रणाली (वैट और केन्द्रीय उत्पाद षुल्क) अस्तित्व में जारी रहेगी।



प्र 7  जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पादों की क्या स्थिति होगी ?

उत्तर: तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पाद जीएसटी के अधीन होगें। इसके अतिरिक्त केन्द्र इन उत्पादों पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क आरोपित करने हेतु सशक्त होगा।



प्र 8. किस प्रकार का जी.एस.टी. लागू करने का प्रस्ताव किया गया है।

उत्तर: यह केंद्र और राज्यों के साथ एक साथ सामान्य कर आधार पर आरोपित एक दोहरा जी.एस.टी. होगा। वस्तुओं या सेवाओं की अंतर-राज्य आपूर्ति पर केंद्र द्वारा लगाये गये कर को केंद्रीय जी.एस. टी. (सी.जी.एस.टी.) कहा जायेगा तथा राज्यों द्वारा लगाये करों को राज्य जी.एस.टी. (एस.जी.एस.टी.) कहा जायेगा। इसी प्रकार केंद्र द्वारा प्रत्येक अंतर-राज्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर एकीकृत जी.एस.टी. (आई.जी.एस.टी.) लगाने तथा प्रशासित करने की व्यवस्था है।


प्र. 9. दोहरा जी.एस.टी. क्यों आवश्यक है?

उत्तर:उपयुक्त कानून के माध्यम से करारोपण और एकत्र करने की शक्तियां प्रदत्त की गई हैं। दोनों सरकार के स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियों का निष्पादन के अनुसार संविधान में शक्तियों का विभाजन निर्धारित होती है। दोहरा जी.एस.टी. इसीलिये, वित्तीय संघवाद की संवैधानिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।



प्र 10. कौन सा प्राधिकरण जी.एस.टी. करारोपण और उसका प्रशासन करेगा?

उत्तर: केंद्र सी.जी.एस.टी. और आई.जी.एस.टी. का करारोपण और प्रशासन करेगा, जबकि संबंधित राज्य एस.जी.एस.टी. करारोपण और प्रशासन करेंगे |


प्र 11. भारत के संविधान को हाल ही में जी.एस.टी. के संदर्भ में क्यों संशोधित किया गया था?

उत्तर: वर्तमान में, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय अधिकार स्पष्ट रूप से संविधान में सीमांकित किये गये हैं जिनमें संबंधित क्षेत्रों के बीच लगभग किसी तरह का ओवरलैप नही है | केंद्र के अधिकार में वस्तुओं के विनिर्माण (सिवाय मानव उपभोग के लिये शराब, अफीम, नशीले पदार्थों आदि को छोड़कर) पर कर लगाने की शक्तियां हैं, जबकि राज्यों के अधिकार में वस्तुओं की बिक्री पर कर लगाने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। अंतर-राज्य बिक्री के मामले में केद्र सरकार को वस्तुओं की बिक्री पर कर (केंद्रीय बिक्री कर) लगाने की शक्ति है लेकिन, कर पूरी तरह से राज्यों द्वारा एकत्र किया जाता है। जहां तक सेवाओं का प्रश्न है, केवल केद्र को सेवा कर लगाने के लिये सशक्त किया गया है।

जी.एस.टी. प्रस्तुत करने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन करने की आवश्यकता थी ताकि केंद्र और राज्यों को एक साथ कर लगाने और एकत्र करने के लिये सशक्त किया जा सके। भारत के संविधान को संविधान के (एक सी एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 द्वारा हाल ही में इस प्रयोजन के लिये संशोधित किया गया था। संविधान का अनुच्छेद 246ए केंद्र और राज्यों का कर लगाने और जी.एस.टी. एकत्र करने के लिए सशक्त करती है।



प्र 12. किस प्रकार वस्तुओं और सेवाओं के एक विशेष लेन-देन के लिये कर एक साथ केंद्रीय जी.एस.टी. (सी.जी.एस.टी.) और राज्य जी.एस.टी. (एस.जी.एस.टी.) के अंर्तगत लगाया जाएगा?

उत्तर: केंद्रीय जी.एस.टी. और राज्य जी.एस.टी. को एक साथ प्रत्येक वस्तुओं और सेवाओं के लेनदेन पर लगाया जायेगा सिवाय छूट दी गई वस्तुओं और सेवाओं और जी.एस.टी. के दायरे से बाहर की वस्तुओं और उन लेनदेन को छोड़कर जिनका मूल्य निर्धारित सीमा से नीचे है। आगे, दोनों पर एक कीमत या मूल्य पर कर लगाया जायेगा राज्य वैट के विपरीत जिसकें अंर्तगत वस्तुओं के मूल्य में सेनवैट जोड़कर वैट लगाया जाता है। जबकि सी.जी.एस.टी. के प्रयोजन के लिये देश के भीतर आपूर्तिकर्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्ता के स्थान का कोई अर्थ नहीं है और एस.जी.एस.टी. तभी लगाया जाएगा जब आपूर्तिकर्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्ता एक ही राज्य के भीतर स्थित हैं।

चित्रण I: मान लीजिए कि सी.जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत और एस.जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत है। जब उत्तर प्रदेश में स्टील का एक थोक व्यापारी एक निर्माण कपनी को स्टील की सलाखों और छड़ों की आपूर्ति करता है जो उसी राज्य के भीतर स्थित है, मान लें कि 100 रूपये में, डीलर 10 रूपये का सी.जी.एस.टी. और 10 रूपये का एस.जी.एस.टी. माल के मूल दाम में जोड़कर वसूल करेगा। उस सी.जी.एस.टी. की रकम केंद्र सरकार के खाते में जमा करनी है, जबकि एस.जी.एस.टी. के हिस्से की राशि संबंधित राज्य सरकार के खाते जमा करना आवश्यक होगा। जाहिर है, कि उसे वास्तव में 20 रुपये (10+10 रुपये) नकद राशि में जमा करना आवश्यक नहीं होगा क्योंकि वह इस दायित्व को अपनी खरीद पर भुगतान किये गये सी.जी.एस.टी. या एस.जी.एस.टी. के (इनपुट, कहते हैं) के विरूद्ध समायोजित करने का हकदार होगा। लेकिन सी.जी.एस.टी. भुगतान करने के लिए उसे केवल अपनी खरीद पर सी.जी.एस.टी. क्रेडिट का उपयोग करने की ही अनुमति दी जाएगी जबकि सी.जी.एस. टी. के लिये वह अकेले एस.जी.एस.टी. के क्रेडिट का उपयोग कर सकता है। दूसरे शब्दों में, एस.जी.एस.टी. क्रेडिट को, आमतौर पर, एस.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न ही एस.जी.एस.टी. क्रेडिट को सी.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

चित्रण II: मान लीजिए, फिर अनुमानत: कि सी.जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत और एस.जी.एस.टी. की दर भी 10 प्रतिशत है। जब मुंबई में स्थित एक विज्ञापन कपनी महाराष्ट्र राज्य के भीतर स्थित एक साबुन विनिर्माण कपनी के लिए विज्ञापन सेवाओं की आपूर्ति करती है, आईये मान लेते हैं कि 100 रूपये, विज्ञापन कपनी सेवा की मूल कीमत पर 10 रूपये सी.जी.एस.टी. और 10 रूपये एस.जी. एस.टी. शुल्क लगायेगी। उसे सी.जी.एस.टी. का हिस्सा केंद्र सरकार के खाते में, और एस.जी.एस.टी. हिस्सा संबंधित राज्य सरकार के खाते में जमा करना आवश्यक होगा। बेशक, उसे फिर से, वास्तव में 20 रुपये (10+10 रु) का नकद भुगतान करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह इस दायित्व को अपनी खरीद पर भुगतान किये गये सी.जी.एस.टी. या एस.जी.एस.टी. के (इनपुट जैसे स्टेशनरी, ऑफिस उपकरण, कलाकारों की सेवाएं इत्यादि कहते हैं) के विरूद्ध समायोजित करने का हकदार होगा। लेकिन सी.जी.एस.टी. भुगतान करने के लिए उसे केवल अपनी खरीद पर सी.जी.एस.टी. क्रेडिट/ जमा का उपयोग करने की ही अनुमति दी जाएगी जबकि एस.जी. एस.टी. के लिये वह अकेले एस.जी.एस.टी. के क्रेडिट का उपयोग कर सकता है। दूसरे शब्दों में, सी.जी.एस.टी. क्रेडिट को, आमतौर पर, एस.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न ही एस.जी.एस.टी. क्रेडिट को सी.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।


प्र 13. वे कौन से लाभ हैं जो देश को जी.एस.टी. से प्राप्त होंगे?

उत्तरः जी.एस.टी. की पेशकश भारत के अप्रत्यक्ष कर सुधारों के क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा। बहुत सारे केंद्रीय और राज्यों के करों को एकल कर में मिलाकर और पूर्व-चरणों के करों को समाप्त करने की अनुमति देकर, यह व्यापक रूप से गिरावट के बुरे प्रभावों को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा और समान राष्ट्रीय बाजार के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा फायदा समग्र माल पर कर बोझ में कमी है, जिसका वर्तमान समय में 25 से 30 प्रतिशत का अनुमान है। जी.एस.टी. की पेशकश हमारे उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रतिस्पर्धी बनाएगा। अध्ययनों से पता चलता है कि इससे आर्थिक विकास में तुरन्त तेजी आ जाती है। वहाँ केंद्र और राज्यों के लिए भी कर आधार को व्यापक करने के कारण राजस्व लाभ हो सकता है, व्यापार में वृद्धि और कर अनुपालन भी बेहतर होगा। अंतिम लेकिन भी आसान होगा |


प्र 14. आई.जी.एस.टी. क्या है?

उत्तरः जी.एस.टी. व्यवस्था के अंर्तगत, अंतर-राज्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर केंद्र द्वारा एकीकृत जी.एस.टी. (आई.जी.एस. टी) कर लगाया और एकत्र किया जायेगा। संविधान के अनुच्छेद 269ए के अंर्तगत, अंतर-राज्य व्यापार या वाणिज्य के दौरान आपूर्ति पर जी.एस.टी. लगाया जाएगा और भारत सरकार द्वारा एकत्र किया जायेगा और कथित कर को केंद्र और राज्य के बीच इस प्रकार से विभाजित किया जायेगा जिस प्रकार संसद द्वारा वस्तु और सेवा कर परिषद की सिफारिशों पर कानून बनाकर किया जा सकता है।



प्र 15. जी.एस.टी. कर लगाने के लिए कौन इसकी दरें तय करेगा?

उत्तर: सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टी. केंद्र और राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से तय की गई दरों पर लगाया जाएगा। दरों को जी. एस.टी. परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचित किया जाएगा।



प्र 16. जी.एस.टी. परिषद की क्या भूमिका होगी?

उत्तरः जी.एस.टी. परिषद के गठन में केंद्रीय वित्त मंत्री (जो परिषद के अध्यक्ष होंगे), राज्यमंत्री (राजस्व) और राज्य वित्त/कराधान मंत्री सम्मिलित होंगे जो केद्र और राज्यों को निम्न पर अपनी सिफारिशें करेंगे:

(i) केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा लगाये करों, उपकरों और अधिभारों पर जिन्हें जी.एस.टी. के अंतर्गत सम्मिलित किया जा सकता है,

(ii) वस्तुओं और सेवाओं पर जो जी.एस.टी. के अधीन की जा सकती हैं या जिन्हें छूट दी जा सकती है,

(iii)  तारीख को पेट्रोलियम कच्चे तेल, हाई स्पीड जल, मोटर स्प्रिट (आमतौर पर पेट्रोल के रूप में ना जाता है), प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर जी.एस.टी. लगाया जाएगा,

(iv) मॉडल जी.एस.टी. कानून, करारोपण के सिद्धांत, आई. जी.एस.टी. का संविभाजन और वे सिद्धांत जो आपूर्ति स्थल को निर्धारित करते हैं,

(v) कुल बिक्री की वह सीमारेखा जिसके नीचे वस्तुओं और सेवाओं को जी.एस.टी. से छूट दी जा सकती है,

(vi) वह दरें जिनमें जी.एस.टी.बैंड सहित न्यूनतम तय दरें शामिल हैं,

(vii) प्राकृतिक आपदा या आपदा के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए कोई विशेष दर या निर्धारित अवधि के लिए तय की गई दरें,

(Viii) उत्तर-पूर्वी राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उतराखड के संबंध में विशेष प्रावधान, तथा

(xi) जी.एस.टी. से संबंधित कोई अन्य मामला, जिसपर परिषद निर्णय ले सकती है,



प्र 17. जी.एस.टी. परिषद के मार्गदर्शक सिद्धांत क्या हैं?

उत्तर: जी.एस.टी. परिषद की प्रक्रिया केंद्र और राज्यों के साथ-साथ राज्यों के बीच जी.एस.टी. के विभिन्न पहलुओं पर सामंजस्य बनाये रखना सुनिश्चित करेगी। संविधान (एक सी एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 में यह प्रावधान किया गया है कि जी.एस.टी. परिषद, अपने विभिन्न कार्यों के निष्पादन में जी.एस.टी. की सामंजस्य संरचना की जरूरत और वस्तुओं और सेवाओं के अनुकूल राष्ट्रीय बाजार के विकास के लिए निर्देशित की जायेगी।


प्र 18. जी.एस.टी. परिषद द्वारा कैसे निर्णय लिया जाएंगे?

उत्तरः संविधान का (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 प्रावधान करता है कि जी.एस.टी. परिषद का प्रत्येक निर्णय बैठक में कम से कम कुल उपस्थित सदस्यों के 3/4 के बहुमत से मतदान करने के बाद लिया जाएगा। बैठक में कुल डाले गये मतों के 1/3 हिस्से का महत्व केद्र सरकार के मतों का और बाकी सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलकर कुल डाले गये मतों का 2/3 हिस्से का महत्व होगा। जी.एस.टी. परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से आधे के साथ बैठकों का कोरम गठित होगा |



प्र 19. प्रस्तावित जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत कौन जी.एस.टी. भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है?

उत्तरः जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत, कर का भुगतान वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर कराधीन व्यक्ति द्वारा देय है। कर के भुगतान के लिए दायित्व तब उत्पन्न होता है जब कराधीन व्यक्ति छट दी गई सीमारेखा (threshold exemption) को पार कर लेता है, यानि 10 लाख रुपए (पूर्वोतर राज्यों के लिए यह 5 लाख रुपये होगी) सिवाय कुछ विशिष्ट मामलों को छोड़कर कराधीन व्यक्ति जी.एस.टी. का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है भले ही उसने निर्धारित सीमा रेखा की छूट को पार नहीं किया है। सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. अंतर-राज्य में आपूर्ति की गई सभी वस्तुओं और/या सेवाओ पर देय है। सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. और आई.जी.एस.टी संबंधित अधिनियमों की अनुसूचियों में निर्दिष्ट दरों पर देय हैं।


प्र 20. जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत छोटे कर दाताओं के लिये क्या लाभ उपलब्ध हैं?

उत्तर: वे कर दाता जिनका एक वित्तीय वर्ष में कुल कारोबार (10 लाख रूपये) तक है उन्हें कर से मुक्त किया जाएगा। (सकल कुल बिक्री में कुल कर योग्य और गैर-कर योग्य आपूर्ति, छूट दी गई आपूर्ति और वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात का कुल मूल्य शामिल होगा और कर अर्थात जी.एस.टी. शामिल नहीं होंगे।) सकल कुल बिक्री की गणना अखिल भारतीय आधार पर की जाएगी। पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम के लिए छूट सीमा (रुपए 5 लाख) होगी। सीमा में छूट के पात्र सभी करदाताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आई.टी.सी) लाभ के साथ कर के भुगतान करने का विकल्प उपलब्ध होगा। अंतर-राज्य आपूर्ति करने वाले कर दाताओं या रिवर्स चार्ज के आधार पर कर का भुगतान कर रहे कर दाताओं को सीमा में छूट की पात्रता प्राप्त नहीं होगी। प्र 20. जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं को कैसे वर्गीकृत किया जाएगा? उत्तर: एच.एस.एन. (हार्मोनाइज्ड सिस्टम आफ नॉमेंक्लेचर) कोड को जी.एस.टी. व्यवस्था के अंर्तगत वस्तुओं को वर्गीकृत करने के लिए प्रयोग किया जाएगा। करदाताओं जिनकी कुल बिक्री/टर्नओवर 1.5 करोड रुपये से ऊपर है लेकिन 5 करोड़ रुपये से कम है, वे 2 अंकों के कोड का उपयोग कर पाएंगे और वह करदाता जिनकी कुल बिक्री/टर्नओवर 5 करोड रुपये और उससे अधिक है वह 4 अंकों के कोड का उपयोग करेंगे। ऐसे करदाताओं को जिनकी कुल बिक्री 1.5 करोड रुपये के नीचे है उन्हें अपने चालान/बिलों पर एचएसएन कोड का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है। सेवाओं को सर्विस एकाउंटिंग कोड के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा (एस.ए.सी.)



प्र 21. जी.एस.टी. व्यवस्था के अंर्तगत आयात पर किस प्रकार कर लगाया जायेगा?

उत्तर: वस्तुओं और सेवाओं के आयात को अंतर-राज्य आपूर्ति के रूप में माना जाएगा और देश में वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर आई.जी.एस.टी. लगाया जाएगा। कर की घटना का गंतव्य सिद्धांत पालन करेंगे और एस.जी.एस.टी. के मामले में कर राजस्व उस

उपभोग किया जा रहा है। वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर पिछले चरण में भुगतान किया गया जी.एस.टी. कर पूरा और सारा (fulland final) सेट-ऑफ (वापसी) पुनः प्राप्त हो जाएगा।


प्र 22. जी.एस.टी. के अंर्तगत निर्यात से कैसे व्यवहार किया जाएगा?

उत्तर निर्यात को शून्य दर की आपूर्ति के रूप में माना जाएगा। वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात पर कोई कर देय नहीं होगा, हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट पर जमा सुविधा उपलब्ध रहेगी और उसे निर्यातकों को रिफड कर दिया जाएगा |



प्र 23. जी.एस.टी. के अंर्तगत संरचना योजना (compositescheme) का कया कार्यक्षेत्र हे?

उत्तर: वे छोटे करदाता जिनकी एक वित्तीय वर्ष में टर्नओवर (50 लाख रुपए) तक है, संरचना कर के पात्र होंगे। इस योजना के अंर्तगत, एक कर दाता बिना आई.टी.सी. लाभ लिये एक वित्तीय वर्ष में अपनी टर्नओवर के प्रतिशत के रूप में कर का भुगतान करत है। सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टी. के लिए कर की सीमारेखा (threshold) की दर (1 प्रतिशत) से कम नहीं होगी। संरचना क विकल्प चयन करने वाला करदाता अपने ग्राहकों से किसी भी प्रकार का कर वसूल नहीं करेगा। वह करदाता जो अंतर-राज्य आपूर्ति कर रहा है या रिवर्स चार्ज आधार पर कर का भुगतान करता है संरचना योजना का पात्र नहीं होगा |


प्र 24. क्या संरचना योजना वैकलिपक या अनिवार्य होगी?

उत्तर: वेकलिपक हे |



प्र 25. जी.एस.टी.एन. क्या है और जी.एस.टी. व्यवस्था में इसकी क्या भूमिका है?

उत्तरः जी.एस.टी.एन. वस्तुओं एवं सेवाओं का कर एक नेटवर्क (जी.एस.टी.एन.) है। यह एक विशेष प्रयोजन के लिये माध्यम है जिसे जी.एस.टी.एन. कहा जाता है और इसे जी.एस.टी. की जरूरतों को पूरा करने के लिये स्थापित किया गया है। जी.एस.टी.एन. केंद्रीय और राज्य सरकारों, कर दाताओं और अन्य हितधारकों को जी.एस. टी. के कार्यान्वयन के लिये आईटी बुनियादी सुविधाएं साझा करेगा जी.एस.टी.एन. के काम में, अन्य बातों के साथ, शामिल होंगे:

(1) पंजीकरण की सुविधा,

(ii) केन्द्रीय और राज्य के अधिकारियों को रिटर्न अग्रेषित करना,

(iii) आई.जी.एस.टी. की संगणना और निपटान,

(iv) बैंकिग नेटवर्क के साथ कर भुगतान विवरणों का मिलान करना,

(v) केन्द्र और राज्य सरकारों को करदाताओं के रिटर्न/वापसी की जानकारी के आधार पर विभिन्न एमआईएस सूचना प्रदान करना,

(vi) करदाताओं के प्रोफाइल का विश्लेषण प्रदान करना, और

(vii इनपुट टैक्स क्रेडिट के मिलान, उलटने और पुर्नदावा करने के लिये उसी के अनुकूल इंजन का संचालन करना।

जी.एस.टी.एन. पंजीकरण, भुगतान, रिटर्न और एम.आई.एस./ रिपोर्ट को लिए एक आम जी.एस.टी. पोर्टल ओर एप्लीकोशंस विकसित कर रहा है। जी.एस.टी.एन. में मौजूदा कर प्रशासन में उपयोग की जा रही आईटी प्रणालियों के साथ एक आम जी.एस. टी. पोर्टल को एकीकृत किया जाएगा और करदाताओं के लिए इंटरफेस का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जी.एस.टी. एन. 19 राज्यों और केंद्रीय शासित प्रदेशों (मॉडल II राज्यों) के लिये मूल्यांकन, लेखा परीक्षण, रिटर्न, अपील इत्यादि के लिये एक बैक-एंड मॉडयूल भी विकसित कर रहा है। सीबीईसी और मॉडल I राज्य (15 राज्य) स्वयं अपने जी.एस.टी. बैक-एंड सिस्टम् विकसित कर रहे हैं। जी.एस.टी. के फ्रट-एंड सिस्टम को बैक-एंड सिस्टम से एकीकृत कर प्रक्रिया सुगम करने के लिये पहले से ही परीक्षण पूरा कर लिया जायेगा।


प्र 26. जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत विवादों का समाधान कैसे किया जायेगा?

उत्तरः संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 प्रदान करता है कि वस्तुओं और सेवाओं की परिषद या उसके कार्यान्वयन की सिफारिशों से उत्पन्न किसी भी विवाद में निर्णय देने के लिये एक मैकेनिज्म स्थापित करेगी

(क) भारत सरकार और एक या एक से अधिक राज्यों के बीच; या

(ख) भारत सरकार और कोई राज्य या एक से अधिक राज्य एक तरफ तथा एक या एक से अधिक राज्य दूसरी तरफ, की बीच, या

(ग) दो या अधिक राज्यों के बीच,


प्र 27. जी.एस.टी. पेश करने के लिये अन्य क्या कानूनी आवश्यकताएं हैं?

उत्तरः जी.एस.टी. (केंद्रीय जी.एस.टी. विधेयक, एकीकृत जी.एस.टी. विधेयक और राज्य जी.एस.टी. विधेयक) करारोपण के लिये उपयुक्त विधेयक को संविधान से शक्तियां प्राप्त हुई हैं जिसे संसद और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित करने की आवश्यकता होगी। संविधान के संशोधन जिसमें 2/3 बहुमत की आवश्यकता होती है उसके विपरीत, जी.एस.टी. विधेयक को एक साधारण बहुमत से पारित करने की आवश्यकता होगी। जाहिर है, कर की वसूली केवल तभी शुरू की जा सकती हैं जब जी.एस.टी. का कानून संसद और संबंधित विधान मंडलों द्वारा अधिनियमित किया जाएगा |

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